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UP: सहारनपुर के शहजाद बने शंकर, कंधे पर लेकर निकले कांवड़, मुस्लिम परिवार ने सनातन धर्म अपनाकर किया ये काम

Mon, 03 Aug 2026 11:51 AM IST
Sharukh Khan अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ
अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ Published by: Sharukh Khan Updated Mon, 03 Aug 2026 11:51 AM IST
सार

सहारनपुर के शहजाद शंकर बन गए। वो कंधे पर कांवड़ लेकर निकले। शंकर ने बताया कि यह उनके जीवन की पहली कांवड़ यात्रा है। उनका जत्था गाजियाबाद के दूधेश्वर महादेव मंदिर में गंगाजल अर्पित कर यात्रा का समापन करेगा। बिजनौर के मुस्लिम परिवार ने सनातन धर्म अपनाने के बाद पहली बार कांवड़ यात्रा शुरू की है।

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Saharanpur Shahzad becomes Shankar sets out carrying a Kanwar on his shoulder in Meerut
Saharanpur Shahzad - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

सहारनपुर के एक मुस्लिम परिवार ने सनातन धर्म अपनाने के बाद पहली बार कांवड़ यात्रा शुरू की है। कभी शहजाद के नाम से जाने जाते रहे सहारनपुर के बेहड़ी गुर्जर निवासी शंकर शिव के रंग में रंगे हैं। वह हरिद्वार से गंगा जल लेकर गाजियाबाद स्थित दूधेश्वर महादेव का जलाभिषेक करने जाएंगे।
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जून 2026 में परिवार सहित हरिद्वार में सनातन धर्म अपनाने के बाद शहजाद ने अपना नाम शंकर और पत्नी सना का नाम सावित्री रखा। धर्म परिवर्तन के बाद वह पहली बार वह कांवड़ यात्रा पर निकले हैं।
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शंकर ने बताया कि वह पत्नी सावित्री तथा अन्य साथियों के साथ हरिद्वार से गंगाजल लेकर गाजियाबाद स्थित दूधेश्वर महादेव मंदिर में जलाभिषेक करने जा रहे हैं। उनके साथ बिजनौर निवासी राजन समेत अन्य श्रद्धालु भी यात्रा में शामिल हैं। सभी ने स्वयं को धर्म परिवर्तन के बाद पहली बार कांवड़ यात्रा करने वाला बताया।
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शंकर का कहना है कि उन्होंने स्वेच्छा से सनातन धर्म अपनाया। अब भगवान शिव के प्रति अपनी आस्था और एक मन्नत पूरी होने पर वह पहली बार कांवड़ लेकर निकले हैं। उन्होंने बताया कि यह यात्रा उनके लिए आध्यात्मिक श्रद्धा और शिव भक्ति का प्रतीक है।

उनका दावा है कि धर्म परिवर्तन के बाद उन्हें समाज का सहयोग और अपनापन मिला, जिससे उनकी धार्मिक आस्था और मजबूत हुई। यात्रा के दौरान गंग नहर पटरी मार्ग पर कई स्थानों पर श्रद्धालुओं और कांवड़ सेवा शिविरों की ओर से जत्थे का स्वागत किया गया। पुष्पवर्षा कर फूल-मालाएं पहनाई गईं और जलपान की व्यवस्था भी कराई गई।

पूरे मार्ग पर हर-हर महादेव और बोल बम के जयघोष गूंजते रहे। शंकर ने बताया कि यह उनके जीवन की पहली कांवड़ यात्रा है। उनका जत्था गाजियाबाद के दूधेश्वर महादेव मंदिर में गंगाजल अर्पित कर यात्रा का समापन करेगा।

पहले भी चर्चा में रहा था मामला
शंकर के अनुसार, जून 2026 में उन्होंने परिवार सहित हरिद्वार में सनातन धर्म अपनाने का दावा किया था। इसके बाद उन्होंने अपना नाम शहजाद से बदलकर शंकर तथा पत्नी का नाम सावित्री रखा। उस समय यह मामला भी क्षेत्र में चर्चा का विषय बना था। अब पहली बार कांवड़ यात्रा में शामिल होने के कारण उनका जत्था एक बार फिर लोगों के बीच चर्चा में रहा।
 

पहली बार कांवड़ यात्रा पर निकले धर्म परिवर्तन का दावा करने वाले श्रद्धालु
सावन माह की कांवड़ यात्रा के दौरान रविवार को मेरठ में गंगनहर पटरी मार्ग पर एक ऐसा जत्था लोगों के बीच चर्चा का विषय बना, जिसमें शामिल श्रद्धालुओं ने स्वयं को पूर्व में मुस्लिम और अब सनातन धर्म का अनुयायी बताया। श्रद्धालुओं का कहना था कि धर्म परिवर्तन के बाद वह पहली बार कांवड़ यात्रा में शामिल हुए हैं। 

 

मार्ग में कई स्थानों पर उनका स्वागत किया गया और श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर उनका उत्साहवर्धन किया। जत्थे में शामिल सहारनपुर निवासी शंकर ने बताया कि वह पहले शहजाद नाम से जाने जाते थे। उनके साथ उनकी पत्नी सावित्री भी यात्रा में शामिल हैं, जिनका दावा है कि उन्होंने भी सनातन धर्म अपनाया है। 

दोनों गंगाजल लेकर गाजियाबाद के दूधेश्वर महादेव मंदिर में जलाभिषेक करने जा रहे हैं। उनके साथ बिजनौर निवासी राजन समेत अन्य श्रद्धालु भी यात्रा में शामिल हैं। सभी ने स्वयं को धर्म परिवर्तन के बाद पहली बार कांवड़ यात्रा करने वाला बताया। श्रद्धालुओं का कहना है कि उन्होंने स्वेच्छा से सनातन धर्म अपनाया और अब भगवान शिव की आराधना के उद्देश्य से कांवड़ यात्रा कर रहे हैं।

उनका दावा है कि धर्म परिवर्तन के बाद उन्हें समाज का सहयोग और अपनापन मिला, जिससे उनकी धार्मिक आस्था और मजबूत हुई। यात्रा के दौरान कई कांवड़ सेवा शिविरों और सामाजिक संगठनों की ओर से जत्थे का स्वागत किया गया।

श्रद्धालुओं को फूलमालाएं पहनाई गईं और जलपान भी कराया गया। पूरे मार्ग पर हर-हर महादेव और बोल बम के जयघोष गूंजते रहे। शंकर ने बताया कि यह उनकी पहली कांवड़ यात्रा है और उनका जत्था गाजियाबाद स्थित दूधेश्वर महादेव मंदिर में गंगाजल अर्पित कर यात्रा का समापन करेगा।
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