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कौन हैं बृजभूषण शरण सिंह: कोई कहता दबंग, कोई रॉबिनहुड, यूपी की सियासत में कितना बड़ा नाम, कितनी सीटों पर दबदबा

Mon, 03 Aug 2026 02:07 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Mon, 03 Aug 2026 02:07 PM IST
सार

बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ पहलवानों की तरफ से लगाए आरोपों अब डब्ल्यूएफआई के पूर्व प्रमुख को राहत मिल गई है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने बृजभूषण शरण सिंह को बरी कर दिया है। इस मामले में फैसले के वक्त बृजभूषण खुद कोर्ट पहुंचे थे और कहा था कि मैं सिर्फ वही सुनूंगा जो कोर्ट कहेगा। मेरे हाथ में कुछ भी नहीं है।

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Brij Bhushan Sharan Singh Profile BJP Leader acquitted in Molestation Case Uttar Pradesh Politics WFI Case
बृजभूषण शरण सिंह। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बृजभूषण शरण सिंह को महिला पहलवानों की तरफ से लगाए गए यौन शोषण के आरोप से राहत मिल गई है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने बृजभूषण शरण सिंह को मामले में बरी कर दिया है। उनके साथ मामले में एक और आरोपी विनोद तोमर को भी बरी किया गया है। 
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बृजभूषण शरण सिंह के बरी होने के बाद यह जानना जरूरी है कि आखिर जिस मामले में अदालत ने उन्हें निर्दोष करार दिया है, वह क्या था? बृजभूषण शरण सिंह कौन हैं और उनका सियासी रसूख कितना है? उत्तर प्रदेश की राजनीति में वे कितने प्रभावी हैं और कितनी सीटों पर उनका असर है? आइये जानते हैं...
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पहले जानें- किस मामले में बरी हुए बृजभूषण शरण सिंह?

18 जनवरी 2023
पहलवान विनेश फोगाट, बजरंग पूनिया समेत करीब 30 पहलवान भारतीय कुश्ती संघ के खिलाफ दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरने पर बैठ गए। पहलवानों का आरोप था कि बृजभूषण शरण सिंह ने अपने पद का दुरुपयोग कर कई महिला खिलाड़ियों का यौन शोषण किया है। छह महिला पहलवानों ने उनके खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए। इन आरोपों में भारतीय कुश्ती महासंघ के कुछ कोचों की संलिप्तता की बात भी कही गई। 
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ये भी पढ़ें: Women Wrestlers Harassment: महिला पहलवानों के शोषण मामले में बृजभूषण शरण बरी, फैसला पर कहा- आज खुशी का दिन है

21 जनवरी 2023
खेल मंत्री अनुराग ठाकुर ने पहलवानों के साथ कई दौर की बात की। बृजभूषण सिंह के खिलाफ लगे आरोपों पर जांच के लिए समिति का गठन किया गया और उन्हें कुश्ती संघ के कामकाज से दूर रहने के लिए कहा गया। पहलवानों ने चार दिन प्रदर्शन करने के बाद धरना खत्म कर दिया।

5 अप्रैल 2023
समिति ने अपनी रिपोर्ट खेल मंत्रालय को सौंप दी। हालांकि, इसे सार्वजनिक नहीं किया गया। कई मीडिया रिपोर्ट में कहा गया कि बृजभूषण पर आरोप लगाने वाली महिला पहलवान सबूत नहीं दे पाईं हैं। इसके बाद खबर आई कि बृजभूषण कुश्ती संघ के अध्यक्ष के तौर पर अपना कार्यकाल पूरा करेंगे, लेकिन आगे चुनाव नहीं लड़ेंगे। यह भी सामने आया कि उन्हें संघ में कोई और जिम्मेदारी मिल सकती है। 

23 अप्रैल 2023
भारतीय पहलवान लगभग तीन महीने बाद फिर जंतर-मंतर में धरने पर बैठ गए। पहलवानों ने सुप्रीम कोर्ट में भी बृजभूषण के खिलाफ एफआईआर को लेकर शिकायत की। 

28 अप्रैल 2023
सुप्रीम कोर्ट में एक बार फिर पहलवानों की याचिका पर सुनवाई हुई। तब कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने पुलिस को शिकायत करने वाली पहलवानों की सुरक्षा तय करने को भी कहा। इसके बाद पहलवानों ने कहा कि बृजभूषण सिंह के गिरफ्तार होने तक धरना जारी रहेगा। वहीं, बृजभूषण सिंह ने खुद को निर्दोष बताया और संकेत दिया कि पूरी ताकत लगाकर खुद को निर्दोष साबित करेंगे।

15 जून 2023
पुलिस ने बृजभूषण के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 354 (शील भंग करना), 354ए (यौन टिप्पणी), 354डी (पीछा करना) और 506(1) (आपराधिक धमकी) के तहत अपराध के लिए आरोप पत्र दायर किया। शुरुआत में बृजभूषण सिंह पर एक नाबालिग पहलवान ने भी आरोप लगाए थे। हालांकि, बाद में उसने अपनी शिकायत वापस ले ली और दिल्ली पुलिस ने उस मामले में यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो अधिनियम) के तहत क्लोजर रिपोर्ट दायर कर दी।

मई 2025
अदालत ने बृजभूषण के खिलाफ नाबालिग की तरफ से लगाए गए आरोपों के खिलाफ दायर क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया और कुश्ती संघ के पूर्व प्रमुख को राहत दी। इस दौरान अदालत ने बाकी पहलवानों के आरोपों पर सुनवाई जारी रखी। 

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बृजभूषण शरण सिंह। - फोटो : अमर उजाला

बृजभूषण सिंह का सियासत में कितना रुतबा?

गोंडा से लड़ा पहला चुनाव, बंपर जीत मिली
बृजभूषण शरण सिंह छह बार के लोकसभा सांसद हैं। बृजभूषण पांच बार भाजपा से और एक बार समाजवादी पार्टी से सांसद बन चुके हैं। 1991 में पहली बार वह भाजपा के टिकट पर उत्तर प्रदेश के गोंडा सीट से चुने गए। यहां उन्होंने प्रतिद्वंद्वी आनंद सिंह को रिकॉर्ड 1.13 लाख वोट से हराया था। 1999 के बाद से वह कभी भी चुनाव नहीं हारे। हालांकि, अलग-अलग चुनाव में उनकी सीट बदलती रही, लेकिन नतीजा हर बार उनके पक्ष में रहा। 1999 में गोंडा सीट से ही लोकसभा सांसद बने। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। बलरामपुर में भाजपा को लगातार हार का सामना करना पड़ रहा था। ऐसे में बृजभूषण को 2004 में इस सीट से टिकट दिया गया और उन्होंने यहां कमल खिला दिया। इसके बाद गोंडा, बलरामपुर, अयोध्या समेत कई जिलों में उनका प्रभुत्व बढ़ता गया। 

भाजपा से निष्कासित हुए, फिर सपा से जीता चुनाव
बृजभूषण ने जुलाई 2008 में लोकसभा के विश्वास मत के दौरान संसद में क्रॉस वोटिंग की। इसके बाद भाजपा ने उन्हें निष्कासित कर दिया। पार्टी से निकाले जाने के बाद बृजभूषण समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए। 2009 में, बृजभूषण सपा के टिकट पर कैसरगंज सीट से लोकसभा सांसद बने।

भाजपा में लौटे, 2024 में पार्टी ने नहीं दिया टिकट
2014 के लोकसभा चुनाव से पहले बृजभूषण शरण सिंह ने एक बार फिर भाजपा का दामन थाम लिया। इसके बाद 2014 और 2019 लोकसभा चुनाव में कैसरगंज सीट से भाजपा के टिकट से जीते। हालांकि, 2024 में विवादों में घिरने की वजह से भाजपा ने उन्हें टिकट नहीं दिया। 

बृजभूषण का कितना है सियासी प्रभाव?
बृजभूषण भले ही कैसरगंज से सांसद रहे हों, लेकिन उनका प्रभाव आसपास की गोंडा, कैसरगंज, बलरामपुर समेत कम से कम पांच लोकसभा सीटों पर माना जाता है। इसके अलावा बृजभूषण की पत्नी केतकी देवी सिंह भी पंचायत अध्यक्ष रही हैं। केतकी गोंडा सीट से लोकसभा सांसद भी रह चुकी हैं। बृजभूषण के बेटे प्रतीक भूषण सिंह गोंडा सदर विधानसभा सीट से विधायक हैं। वहीं, कैसरगंज सीट से उनके बेटे करण भूषण सिंह सांसद हैं।  

कहा जाता है कि भाजपा नेता का गोंडा, बहराइच, डुमरियागंज, कैसरगंज और श्रावस्ती जिलों में टिकट बंटवारे में दबदबा रहता है। स्थानीय नेता तो यहां तक दावा करते हैं कि उन्हें जीतने के लिए किसी के मदद की जरूरत नहीं, बल्कि हर पार्टी उन्हें खुद ही टिकट देना चाहती है।

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बृजभूषण शरण सिंह। - फोटो : अमर उजाला
उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार मनीष मिश्रा ने अमर उजाला को एक मौके पर बताया था कि बृजभूषण शरण सिंह की उत्तर प्रदेश में दबंग और रॉबिनहुड जैसी इमेज है। उनका कहना था कि बृजभूषण पर कई मुकदमे दर्ज हुए। कुछ मामलों में वे बरी हो गए, कुछ अभी चल रहे हैं, लेकिन उनका दबदबा लगातार बना हुआ है।


क्या जातिगत प्रभाव भी बृजभूषण के साथ है?

बृजभूषण सिंह के सियासी प्रभुत्व की वजह उनके साथ रहने वाला जातिगत समीकरण भी है। वह क्षत्रिय समाज से आते हैं। कैसरगंज लोकसभा सीट की बात करें तो यहां समाज के करीब 20 फीसदी वोटर हैं जिनके ज्यादातर वोट बृजभूषण के लिए पड़ते रहे हैं। इसके अलावा गोंडा, बहराइच, डुमरियागंज, कैसरगंज और श्रावस्ती जिलों में भी इस समाज का मजबूत वोटबैंक है। 

बृजभूषण शरण सिंह पहले किन मामलों में घिरे?

  • बृजभूषण शरण सिंह उन 40 आरोपियों में से एक थे, जिन्हें 1992 में अयोध्या में विवादित ढांचा गिराने के लिए जिम्मेदार कहा गया था। हालांकि, लंबे समय तक कानूनी लड़ाई के बाद 30 सितंबर 2020 को कोर्ट ने उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया।  
  • 1993 में बृजभूषण शरण सिंह पर दाऊद इब्राहिम के गुर्गों को संरक्षण देने का आरोप लगा। बाद में उन्हें टाडा के अंतर्गत तिहाड़ जेल में बंद किया गया। उन पर हत्या-डकैती समेत कई मुकदमे दर्ज हुए। हालांकि, अदालत से उन्हें मामले में राहत मिल गई।
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